क्रोएशिया के दलमेटियन तट पर बने एक अनोखे इंस्टॉलेशन ने दुनिया को हैरान कर दिया है। यहां पारंपरिक सोलर पैनलों की जगह 300 काँच की शीट्स लगाई गई हैं और आश्चर्यजनक रूप से इस सिस्टम ने 46,500 kWh स्वच्छ ऊर्जा पैदा कर दिखाया है। यह सिर्फ बिजली बनाने का नया तरीका नहीं है, बल्कि भविष्य के ऊर्जा समाधानों की दिशा दिखाने वाला एक कलात्मक प्रयोग है।

काँच की शीट्स से बिजली! तकनीक और कला का अनोखा संगम
आमतौर पर काँच का इस्तेमाल सजावट या सुरक्षा के लिए होता है, लेकिन क्रोएशिया के शहर ज़ाडार में इसे बिजली उत्पादन की मशीन बना दिया गया है। ‘Monument to the Sun’ या ‘The Greeting to the Sun’ नाम की यह संरचना 22 मीटर व्यास वाले एक विशाल सर्कल के रूप में बनाई गई है, जिसमें 300 मल्टी-लेयर ग्लास प्लेट्स लगी हैं। यह इंस्टॉलेशन दिन में सूर्य की रोशनी को अवशोषित कर ऊर्जा जमा करता है और रात में बिजली के रूप में उसे वापस देता है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह ऊर्जा सिर्फ तकनीकी उपयोग के लिए ही नहीं, बल्कि लोगों के मनोरंजन के लिए भी काम आती है। रात में पूरा सर्कल रोशनी से जगमगा उठता है और रंग-बिरंगी लाइटों का अनोखा शो लोगों को आकर्षित करता है। यानी, एक ही प्रोजेक्ट से पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है और स्वच्छ ऊर्जा भी पैदा की जा रही है यानी की दो निशाने, एक तीर।
क्रोएशिया का चमकता आइडिया: सौंदर्य के साथ सस्टेनेबिलिटी
इस ग्लास-सोलर इंस्टॉलेशन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह ऊर्जा उत्पादन को बेहद सरल और कलात्मक तरीके से पेश करता है। आमतौर पर ऊर्जा उत्पादन को भारी मशीनों, वायरों और तकनीकी जटिलताओं से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह प्रोजेक्ट साबित करता है कि स्वच्छ ऊर्जा सौंदर्य और उपयोगिता दोनों का बेहतरीन मेल हो सकती है।
ज़ाडार शहर सूरज की रोशनी के लिए प्रसिद्ध है, इसलिए यहां यह प्रयोग काफी सफल साबित हुआ। दिन में ग्लास प्लेट्स सोलर पैनल की तरह काम करती हैं, और रात में शहर के लोगों को बिजली उपलब्ध कराती हैं। यह पूरी तरह पर्यावरण-हितैषी व्यवस्था है, जो ग्रीनहाउस गैसों में कमी लाने में मदद करती है। यही कारण है कि इस इंस्टॉलेशन को आज दुनिया भर में सस्टेनेबिलिटी का एक अनोखा उदाहरण माना जा रहा है।
क्या दुनिया इसे कॉपी कर सकती है?
हालांकि यह विचार बेहद अनोखा और सफल है, लेकिन इसे हर जगह अपनाना आसान नहीं होगा। ऐसे काँच के पैनल महंगे होते हैं और आसानी से टूट भी सकते हैं, इसीलिए इनकी सुरक्षा और रखरखाव में निवेश की आवश्यकता है। साथ ही, यह मॉडल उन्हीं जगहों पर कारगर होगा जहां सूर्य की रोशनी पर्याप्त मात्रा में मिलती है।
फिर भी, इस प्रोजेक्ट का असली संदेश एक बड़े लक्ष्य की ओर इशारा करता है — स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। चाहे कला के माध्यम से हो, चाहे नवाचार के माध्यम से, दुनिया भर के देशों को मिलकर कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में कदम उठाने होंगे।
आखिरकार, ऊर्जा सिर्फ मशीनों से नहीं, बल्कि रचनात्मकता और सकारात्मक सोच से भी पैदा की जा सकती है। क्रोएशिया का यह प्रयोग यही साबित करता है कि भविष्य की ऊर्जा रंगों, रोशनी और नवाचार से भरा हो सकता है।
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