अब सोलर से मिलेगी 24 घंटे बिजली, इस नई टेक्नोलॉजी ने किया कमाल! 

भारत में सौर ऊर्जा अब केवल दिन की रोशनी तक सीमित नहीं रही, बल्कि 24 घंटे बिजली देने की दिशा में सबसे बड़ा कदम उठ चुका है। नई रिपोर्टों के अनुसार सौर ऊर्जा के भंडारण (Solar Energy Storage) की लागत में ऐतिहासिक गिरावट आई है, जिससे रात के समय भी सस्ती और विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी। यह बदलाव सिर्फ एक तकनीकी अपडेट नहीं, बल्कि भारत जैसे तेजी से बढ़ते ऊर्जा बाज़ारों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

सौर ऊर्जा स्टोरेज की लागत में रिकॉर्ड गिरावट

थिंक टैंक ‘अंबर’ की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि साल 2025 में बैटरी स्टोरेज की लागत गिरकर सिर्फ 65 डॉलर प्रति मेगावॉट-घंटा रह गई है। ऊर्जा क्षेत्र में यह अब तक की सबसे तेज़ गिरावट मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार बैटरी उपकरणों की कीमतें पिछले दो सालों में पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में कम हुई हैं।

रिपोर्ट बताती है कि केवल 2024 में ही बैटरी उपकरणों के दाम 40% तक गिर चुके थे और यह ट्रेंड 2025 में भी जारी है। बैटरी स्टोरेज सिस्टम की कुल लागत अब लगभग 125 डॉलर/किलोवॉट-घंटा रह गई है, जिसमें से 75 डॉलर सिर्फ बैटरी उपकरणों की कीमत है, जो मुख्य रूप से चीन से आती है। बाकी लागत इंस्टॉलेशन और ग्रिड कनेक्शन में खर्च होती है। इस गिरावट का सीधा मतलब है कि अब सौर ऊर्जा को बड़े पैमाने पर स्टोर किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर किसी भी समय, यहां तक कि रात में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रगति?

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां बिजली की मांग सबसे तेज़ी से बढ़ रही है। साथ ही, भारत ने 2030 तक 500 गीगावॉट नॉन-फॉसिल फ्यूल कैपेसिटी का लक्ष्य भी रखा है। ऐसे में सौर ऊर्जा को सस्ता और 24×7 उपलब्ध बनाना भारत के ऊर्जा भविष्य को पूरी तरह बदल सकता है।

कोयले पर निर्भरता कम करने के लिए बैटरी स्टोरेज टेक्नोलॉजी एक अहम भूमिका निभाएगी। रिपोर्ट के अनुसार यदि दिन की आधी सौर बिजली स्टोर की जाए तो यह स्टोरेज मात्र 33 डॉलर/मेगावॉट-घंटा की अतिरिक्त लागत डालती है, जो पारंपरिक थर्मल बिजली की तुलना में काफी कम है। यह बदलाव घरेलू उपभोक्ताओं से लेकर उद्योगों तक, सभी के लिए बिजली को सस्ता और स्थिर बनाने की क्षमता रखता है।

जलवायु बदलाव से लड़ाई में मिलेगा बड़ा फायदा

बैटरी की उम्र, दक्षता और वित्तीय लागत में आई कमी जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में नई उम्मीद देती है। जब बिजली नवीकरणीय स्रोतों से आएगी और बैटरी में सुरक्षित रहेगी, तो थर्मल प्लांटों की आवश्यकता कम होगी, जिससे कार्बन उत्सर्जन में बड़ी गिरावट आएगी।

यह टेक्नोलॉजी ग्रामीण भारत में बिजली की समस्या दूर करने में भी अहम साबित हो सकती है, जहां अभी भी कई जगह बिजली की सप्लाई अनियमित रहती है। सोलर + बैटरी मॉडल के जरिए गांव, छोटे कस्बे और दूरदराज के इलाके 24 घंटे बिजली की सुविधा पा सकते हैं।

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