साइंटिस्ट्स ने बनाई ‘गेंद जैसी’ सोलर टेक्नोलॉजी, गोल सोलर सेल्स से मिलेगी 40% ज़्यादा पावर!

पारंपरिक फ्लैट सोलर पैनल्स को भूल जाइए, अब सौर ऊर्जा का नया युग शुरू हो गया है। किंग अब्दुल्ला यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (KAUST) के वैज्ञानिकों ने ऐसी “गेंद जैसी” सोलर टेक्नोलॉजी विकसित की है जो किसी भी दिशा से आने वाली रोशनी को सोख सकती है। इसका नाम है Spherical Solar Cells — यानी गोल आकार वाले सोलर सेल्स है।

Spherical Solar Cell technology

यह नई तकनीक न केवल सीधे सूरज की किरणों को बल्कि diffused यानी बिखरी हुई और reflected यानी परावर्तित रोशनी को भी कैप्चर करती है। इसका मतलब है, अब बिजली उत्पादन सिर्फ धूप की दिशा पर निर्भर नहीं रहेगा। यही वजह है कि इस नई डिजाइन से पारंपरिक फ्लैट सोलर पैनल्स की तुलना में करीब 40% ज़्यादा पावर आउटपुट प्राप्त किया जा सकता है।

कैसे काम करती है यह ‘गेंद जैसी’ सोलर टेक्नोलॉजी?

वैज्ञानिकों ने एक अनोखी corrugation technique का इस्तेमाल किया है, जिससे कठोर सिलिकॉन को लचीला बनाया जा सकता है और फिर उसे गोल आकार में ढाला जा सकता है। पारंपरिक सोलर पैनल जहां सूरज की दिशा बदलने पर “tracking systems” की मदद से एडजस्ट होते हैं, जो काफी महंगे और जटिल होते हैं — वहीं ये गोल सोलर सेल्स बिना किसी मूवमेंट के हर कोण से रोशनी पकड़ सकते हैं।

इनकी विशेषता यह है कि ये न सिर्फ सूरज की सीधी किरणों से बल्कि वायुमंडल में बिखरी हुई रोशनी, ज़मीन से परावर्तित प्रकाश और इमारतों के अंदर तक फैली ambient light को भी बिजली में बदल देते हैं। जब इन सेल्स को रेगिस्तान जैसी जगहों में रिफ्लेक्टिव रेत के साथ टेस्ट किया गया, तो 14.8% अधिक पावर आउटपुट मिला। वहीं सफेद रिफ्लेक्टिव बैकग्राउंड पर यह अंतर लगभग 39.7% तक पहुंच गया, जो अपने आप में रिकॉर्ड है।

भविष्य की ऊर्जा का नया चेहरा

इस गेंदनुमा डिजाइन का एक और बड़ा फायदा है — low maintenance। फ्लैट पैनल्स पर धूल और मिट्टी जम जाती है, जिससे उनकी क्षमता घटती है। लेकिन गोल सोलर सेल्स अपने आकार के कारण खुद-ब-खुद धूल कम पकड़ते हैं। इसका मतलब है, ये अधिक दिनों तक समान कार्यक्षमता के साथ चलते हैं और सफाई की जरूरत भी कम पड़ती है।
इस तकनीक का उपयोग सिर्फ छतों या बड़े सोलर फार्म तक सीमित नहीं रहेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह wearable devices, smart gadgets और space applications में भी उपयोगी साबित होगी। यहां तक कि शहरों के अंदर या उन देशों में भी, जहां धूप कम पड़ती है, यह सोलर गेंद तकनीक रोशनी की हर किरण से बिजली पैदा कर सकती है।

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