दुनिया में पहली बार ऐसा चमत्कार होने जा रहा है, जहाँ एक सोलर पार्क न सिर्फ बिजली बनाएगा, बल्कि रोजाना 250 लीटर हाइड्रोजन भी तैयार करेगा—वो भी बिना पानी, बिना Rare Metals और बिना किसी भारी इंफ्रास्ट्रक्चर के। बेल्जियम की चार दिग्गज कंपनियों Ether Energy, SunBuild, Solhyd और Nippon Gases ने मिलकर एक ऐसा Solar Hydrogen Park बनाने का फैसला किया है, जो आने वाले दशक में ऊर्जा सेक्टर की तस्वीर बदल सकता है। यह प्रोजेक्ट 2026 में बेल्जियम के वालोनिया इलाके में तैयार होगा, जिसमें Solhyd की क्रांतिकारी मॉड्यूल तकनीक को लगाया जाएगा। KU Leuven University में विकसित यह तकनीक हवा और धूप से सीधे हाइड्रोजन बनाती है। इससे न पानी की जरूरत, न इलेक्ट्रोलिसिस प्लांट और न महंगे Rare Metals की।

कैसे काम करेगा यह अनोखा सोलर हाइड्रोजन पार्क?
इस पार्क में एक 2 मेगावॉट-पीक सोलर प्लांट, बैटरी स्टोरेज और 50 kW क्षमता वाले हाइड्रोजन मॉड्यूल लगाए जाएंगे। जब धूप पड़ेगी, ये मॉड्यूल हवा में मौजूद moisture और सौर ऊर्जा की मदद से सीधे ग्रीन हाइड्रोजन तैयार करेंगे।
इस सेटअप का लक्ष्य है—
- सोलर बिजली और हाइड्रोजन दोनों का उत्पादन
- उद्योगों को साफ ऊर्जा देना
- ग्रीन हाइड्रोजन को सस्ता और आसानी से स्केलेबल बनाना
Solhyd के CEO Jan Rongé के मुताबिक, यह दुनिया का पहला प्रोजेक्ट है जो ग्रीन हाइड्रोजन को व्यावहारिक स्तर पर साबित करेगा। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक डेमो नहीं, बल्कि ग्रीन हाइड्रोजन को मास-स्केल में लाने का रास्ता है।
दुनिया में ग्रीन हाइड्रोजन का भविष्य क्यों बदल जाएगा?
ग्लोबल एनर्जी मार्केट में हाइड्रोजन को भविष्य का ईंधन माना जा रहा है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी चुनौती है—इसे बनाने की लागत और भारी इंफ्रास्ट्रक्चर।
पर Solhyd का मॉडल गेम-चेंजर है:
- मॉड्यूलर (जहाँ चाहे वहाँ लगाओ)
- कम खर्चीला
- पानी की जरूरत नहीं
- Rare Metals की जरूरत नहीं
- डायरेक्ट सनलाइट-टू-हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी
यही कारण है कि Nippon Gases जैसे दिग्गज इस प्रोजेक्ट की हाइड्रोजन स्टोरेज और सप्लाई संभाल रहे हैं। उनके मुताबिक, अब इंडस्ट्री को वह मिलेगा जिसकी इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है यह सस्ता और पूरी तरह ग्रीन हाइड्रोजन है।Ether Energy का मानना है कि यह प्रोजेक्ट निवेशकों के लिए नई संभावनाएं खोल देगा, क्योंकि अब सोलर पार्क सिर्फ बिजली नहीं बल्कि दोहरी कमाई वाली ऊर्जा साइट बनेंगे।आने वाले वर्षों में इस मॉडल को यूरोप ही नहीं बल्कि भारत जैसे धूप से भरपूर देशों में भी तेजी से अपनाया जा सकता है। कंसोर्टियम ने 2028 में दोबारा 2 MW का बड़ा प्रोजेक्ट लॉन्च करने की तैयारी कर ली है। पांच साल तक चलने वाला यह डेमो साबित करेगा कि भविष्य की ऊर्जा सिर्फ धूप पर निर्भर होकर भी दुनिया को चला सकती है।
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