राजस्थान के डूंगर सिंह ने बनाया एक फोन की कीमत में 1kW Sunwind Turbine, 20 साल तक देगा सोलर पैनल से दुगनी बिजली! 

राजस्थान के बाड़मेर जैसे सुनसान रेगिस्तानी इलाके से निकलकर एक युवा ने पूरी ऊर्जा दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यह कहानी है संखली गांव के डूंगर सिंह सोढ़ा की, जिन्होंने बचपन की बिजली कटौती की समस्या को ही अपने इनोवेशन का आधार बनाया। कल्पना कीजिए, एक ऐसी पवन चक्की जिसे आप एक अच्छे स्मार्टफोन की कीमत में खरीद सकते हैं और वह अगले 20 साल तक आपके घर को मुफ्त बिजली दे सकती है। यही है 1kW का सन विंड टर्बाइन एक ऐसा समाधान है जो सौर ऊर्जा से भी दोगुना दमदार साबित हो रहा है। डूंगर ने इंजीनियरिंग के बाद 2023 में सूरत में अपनी कंपनी ‘सनविंड इनोवेटिव’ शुरू की और तभी से रिन्यूएबल एनर्जी की दुनिया में एक नई उम्मीद जगाई।

1kw Sunwind Turbine by dungar singh

टर्बाइन की तकनीक: कम हवा में भी चौबीसों घंटे बिजली

डूंगर सिंह का 1kW सन विंड टर्बाइन एक पोर्टेबल, वर्टिकल एक्सिस मॉडल है, जिसे रूफटॉप पर बिना किसी ऊंचे टॉवर के सीधे इंस्टॉल किया जा सकता है। यह सिर्फ 1.5–2 मीटर/सेकंड की बेहद कम हवा में भी बिजली बनाना शुरू कर देता है, जो इसे भारतीय मौसम के लिए परफेक्ट बनाता है। यह टर्बाइन हाई RPM पर चलता है, वह भी लगभग जीरो नॉइज के साथ, जिससे इसे घर, फार्महाउस या छोटे बिजनेस कहीं भी लगाया जा सकता है। 

खास बात यह है कि यह दिन और रात दोनों समय बिजली पैदा करता है, जबकि सोलर पैनल केवल दिन में ही काम करते हैं। एक सामान्य 1kW सोलर सिस्टम जहां रोजाना 4–5 यूनिट बिजली देता है, वहीं डूंगर का यह टर्बाइन 8 से 20 यूनिट तक बिजली बना सकता है। यही कारण है कि यह सोलर पैनल से लगभग दोगुनी बिजली देने का दावा करता है।

कीमत में सस्ता, उपयोग में आसान और रखरखाव में लगभग शून्य

सन विंड टर्बाइन की सबसे बड़ी खासियत इसकी सस्ती कीमत और आसान इंस्टॉलेशन  है। इसका बेस मॉडल करीब ₹30,000 से शुरू हो जाता है, जबकि 1kW वाला मॉडल ₹50,000 तक आता है। यह उन लोगों के लिए खासतौर पर उपयोगी है जो बिजली बिल से परेशान हैं या ऐसे इलाकों में रहते हैं जहां पावर कट एक सामान्य समस्या है। यह टर्बाइन 20 साल तक बिना मेंटेनेंस चल सकता है, क्योंकि इसमें कोई भारी गियरबॉक्स, टावर या जटिल मेकैनिज़्म नहीं है। डूंगर के मुताबिक, हवा मुफ्त है और इस सिस्टम में बैटरी की भी जरूरत नहीं पड़ती है जिससे लागत काफी कम हो जाती है। यही वजह है कि एक बार की लागत 3–4 साल में रिकवर हो जाती है और उसके बाद बिजली लगभग फ्री मिलती रहती है।

अंतरराष्ट्रीय पहचान और भारत में बढ़ती मांग

आज यह छोटा सा इनोवेशन सिर्फ राजस्थान ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी पहचान बना चुका है। डूंगर सिंह को उनके इस टर्बाइन का पेटेंट मिल चुका है और उनकी कंपनी 20 से अधिक देशों जैसे यमन, मॉरीशस और अफ्रीका के कई हिस्सों में इन टर्बाइनों का निर्यात कर रही है। राजस्थान सरकार के साथ उनका ₹400 करोड़ का बड़ा MoU भी हुआ है, जिससे राज्य भर में रूफटॉप विंड टर्बाइनों का नेटवर्क स्थापित किया जाएगा।

2025 में लॉन्च हुआ उनका नया मॉडल ‘सन विंड ऑरा’ किसानों, स्कूलों और छोटे व्यवसायों के लिए एक किफायती समाधान बन चुका है। डूंगर कहते हैं कि जागरूकता और सरकारी सब्सिडी मिल जाए तो हर घर की छत पर ऐसी टर्बाइन लग सकती है, जिससे भारत की कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता तेजी से कम हो सकती है।

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