चीन की दिग्गज सोलर कंपनी Astronergy ने सोलर इंडस्ट्री में एक और बड़ा कदम उठाते हुए 750 वॉट का Anti-Dust TOPCon सोलर मॉड्यूल लॉन्च किया है। यह नया मॉड्यूल खास तौर पर उन इलाकों के लिए डिजाइन किया गया है, जहां धूल, प्रदूषण और कम बारिश के कारण सोलर पैनलों की परफॉर्मेंस प्रभावित होती है। Astronergy, जो Chint Group की सोलर यूनिट है, ने अपने इस नए Astro N7 सीरीज के जरिए रेजिडेंशियल और कमर्शियल रूफटॉप मार्केट को टारगेट किया है। कंपनी का दावा है कि यह मॉड्यूल न सिर्फ ज्यादा बिजली पैदा करेगा, बल्कि मेंटेनेंस की झंझट भी कम करेगा।

नई तकनीक और दमदार डिजाइन
Astro N7 मॉड्यूल में n-type TOPCon सेल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जो मौजूदा सोलर टेक्नोलॉजी में सबसे एडवांस मानी जाती है। यह मॉड्यूल 725 से 750 वॉट तक की पावर देता है और इसकी अधिकतम एफिशिएंसी 23.2 प्रतिशत बताई जा रही है। खास बात यह है कि इसमें 210R रेक्टेंगुलर वेफर को 90 डिग्री घुमाकर लगाया गया है, जिससे एक्टिव एरिया बढ़ जाता है और कम जगह में ज्यादा बिजली पैदा होती है। यह डिजाइन मौजूदा माउंटिंग सिस्टम और इन्वर्टर के साथ भी पूरी तरह से कम्पैटिबल है, जिससे इंस्टॉलेशन आसान हो जाता है।
Anti-Dust फ्रेम से बढ़ेगी बिजली उत्पादन
इस मॉड्यूल की सबसे बड़ी खासियत इसका Anti-Dust फ्रेम आर्किटेक्चर है। इसमें निचले हिस्से का फ्रेम छोटा रखा गया है, ताकि धूल और मिट्टी जमा न हो सके। कंपनी के अनुसार, बारिश का पानी अपने आप पैनल को साफ कर देता है, जिससे नेचुरल सेल्फ-क्लीनिंग होती रहती है। वुहान में किए गए फील्ड टेस्ट में यह सामने आया है कि इस डिजाइन से हर महीने औसतन 2.59 प्रतिशत ज्यादा एनर्जी जनरेशन हुई है, जबकि कुछ मामलों में यह बढ़त 6.6 प्रतिशत से भी ज्यादा रही। अगर इसे 10 मेगावॉट के कमर्शियल प्रोजेक्ट में देखा जाए, तो सालाना करीब 1.5 लाख यूनिट अतिरिक्त बिजली मिल सकती है, जिससे सफाई का खर्च भी कम होगा।
वारंटी, उत्पादन और भारत जैसे बाजारों में असर
Astro N7 मॉड्यूल में ड्यूल ग्लास स्ट्रक्चर दिया गया है और यह 1,500 वोल्ट डीसी सिस्टम के लिए सर्टिफाइड है। कंपनी 15 साल की प्रोडक्ट वारंटी और 30 साल की परफॉर्मेंस गारंटी दे रही है, जिसमें 30 साल बाद भी कम से कम 87.4 प्रतिशत आउटपुट बने रहने का दावा किया गया है। Astronergy का कहना है कि इस Anti-Dust मॉड्यूल का मास प्रोडक्शन शुरू हो चुका है और 2025 के अंत तक इसकी शिपमेंट 3 गीगावॉट से ज्यादा हो सकती है। भारत जैसे धूल भरे और हाई टेम्परेचर वाले बाजारों में यह मॉड्यूल खास तौर पर गेम चेंजर साबित हो सकता है, जहां कम जगह में ज्यादा बिजली और बेहतर रिटर्न की जरूरत होती है।
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