आज दुनिया जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रही है, जहां हर देश ऐसी तकनीक की तलाश में है जो साफ, सस्ती और लगातार बिजली दे सके। इसी बीच फिलीपींस के एक युवा स्टूडेंट Carvey Ehren Maigue ने ऐसा कमाल कर दिखाया है, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी। उन्होंने फूड वेस्ट से बना ऐसा सोलर पैनल तैयार किया है जो बिना सीधी धूप के भी बिजली बनाता है और इसका नाम उन्होंने दिया—AuREUS (Aurora Renewable Energy & UV Sequestration)।

यह इनोवेशन उन्होंने सिर्फ कॉलेज प्रोजेक्ट के तौर पर नहीं बल्कि किसानों और पर्यावरण दोनों की समस्या हल करने के लिए बनाया था। इतना ही नहीं, उनके इस आविष्कार ने उन्हें पहला ग्लोबल James Dyson Sustainability Award भी दिलाया, जिससे दुनिया का ध्यान उनकी ओर गया।
कैसे काम करता है ये कमाल का AuREUS Solar Panel?
यह साधारण सोलर पैनलों से बिल्कुल अलग है क्योंकि यह सीधी सूरज की रोशनी पर निर्भर नहीं है। पारंपरिक पैनल तभी बिजली बनाते हैं जब उन पर पर्याप्त धूप पड़े, लेकिन AuREUS का सिद्धांत बिल्कुल नया और वैज्ञानिक रूप से उन्नत है।
इस पैनल की खासियत इसके ल्यूमिनेसेन्ट कण हैं, जो फलों और सब्जियों के बर्बाद हिस्सों यानी food waste से तैयार किए जाते हैं। ये कण UV किरणों को अब्सोर्ब करते हैं और फिर उन्हें visible light में बदलकर पैनल के किनारों पर लगे photovoltaic cells तक पहुंचा देते हैं। इसके बाद ये सेल उसे DC बिजली में कन्वर्ट कर देते हैं।
सीधे शब्दों में प्रोसेस:
UV Light → Visible Light → Electricity
सबसे खास बात यह है कि UV प्रकाश बादलों, छाया और वातावरण में हमेशा मौजूद रहता है, इसलिए यह पैनल बारिश, बादल, या कम रोशनी वाले दिनों में भी काम करता है। यहां तक कि इसे खिड़कियों, दीवारों और ऊर्ध्वाधर सतहों पर लगाया जा सकता है, जिससे शहरी क्षेत्रों में भी बिजली उत्पादन आसान हो जाता है।
किसानों, शहरों और पर्यावरण—तीनों के लिए गेम-चेंजर
Carvey ने इस तकनीक को बनाने के लिए लगभग 80 तरह के फलों और फसलों पर परीक्षण किया, जिनमें से 9 ऐसे मिले जो लंबे समय तक UV कैप्चर कर सकते थे। इनसे तैयार किया गया सिंथेटिक रेज़िन Borealis Solar Windows और Astralis Solar Walls में उपयोग होता है, जिन्हें इमारतों पर लगाया जा सकता है।
इसका मतलब है कि भविष्य में बिना किसी अतिरिक्त जमीन के पूरी बिल्डिंग एक वर्टिकल सोलर फार्म की तरह बिजली बना सकेगी। इसके कई पर्यावरणीय और आर्थिक फायदे है जैसे फूड वेस्ट का उपयोग होकर कचरा कम होगा। किसानों को बेकार फसल से भी आय मिलेगी। पारंपरिक सोलर पैनलों से ज्यादा क्षेत्रों में इंस्टॉल हो सकता है। UV पॉल्यूशन कम होगा और शहरों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
कहा जा रहा है कि जहां पारंपरिक पैनल सिर्फ 15–22% ही लाइट कैप्चर कर पाते हैं, वहीं AuREUS लगभग 50% UV कैप्चर कर लेता है, जिससे बिजली उत्पादन काफी ज्यादा हो सकता है।
2025 तक यह टेक्नोलॉजी अभी प्रोटोटाइप स्टेज में है, लेकिन Carvey की कंपनी Hyperboréal Solutions इसे कमर्शियल बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। अगर यह सफलतापूर्वक बाजार में आता है, तो यह सोलर इंडस्ट्री के सबसे बड़े बदलावों में से एक साबित होगा।
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