DRDO ने बनाया 675 HP का राक्षस इंजन! टेस्टिंग में निकली ऐसी ताकत कि विदेशी कंपनियों में मचा गया हड़कंप

भारत की डिफेंस टेक्नोलॉजी ने एक बार फिर दुनिया को दिखा दिया है कि अब वह सिर्फ पीछा नहीं, बल्कि मुकाबला भी कर सकता है। DRDO की कॉम्बैट व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (CVRDE) ने ऐसा कमाल कर दिया है, जिसकी चर्चा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही है। 600 HP पर डिजाइन किए गए हाई पावर डेंसिटी डीजल इंजन ने हालिया टेस्टिंग में सीधे 675 HP की राक्षसी ताकत निकाल दी। यह प्रदर्शन 12.5% से भी अधिक बढ़ोतरी दिखाता है, जो किसी भी मिलिट्री इंजन के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। खास बात यह है कि इतनी भारी पावर के बावजूद इंजन थर्मल और रिलायबिलिटी मार्जिन के अंदर सुरक्षित तरीके से चलता रहा।

DRDO develops powerful 675 HP engine

यही नहीं, यह उपलब्धि पूरी तरह भारत में तैयार टेक्नोलॉजी का नतीजा है। DRDO और अशोक लीलैंड के पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल में इसे विकसित किया गया है। यह इंजन उन विदेशी कंपनियों के लिए बड़ा झटका है, जिनके इंजन पर भारतीय प्रोजेक्ट पहले निर्भर रहते थे।

लद्दाख की ऊंचाई पर भी दी दमदार परफॉर्मेंस

CVRDE के अवाड़ी स्थित इंजन रिसर्च सेंटर में इस इंजन ने कुल 500 घंटे की एंड्योरेंस टेस्टिंग पास की, जो इसकी मजबूती का सबसे बड़ा प्रमाण है। इसके बाद इसे लेह में हाई-एल्टीट्यूड ट्रायल के लिए भेजा गया। 4500 मीटर ऊंचाई पर, जहां हवा पतली होती है और इंजनों की ताकत अक्सर कम हो जाती है, वहां इस पॉवरपैक ने लगातार 640–675 HP आउटपुट देकर इंजीनियरों को हैरान कर दिया। इसके EGT (Exhaust Gas Temperature) भी सुरक्षित दायरे में रहे, जो बताता है कि इंजन न सिर्फ पावरफुल है, बल्कि भरोसेमंद भी है।

इसी स्थिर परफॉर्मेंस के आधार पर इंजीनियरों ने इसे आधिकारिक रूप से ‘री-रेट’ कर दिया है। यह भविष्य के भारतीय ट्रैक्ड आर्मर्ड व्हीकल्स के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा। खासकर FICV (Future Infantry Combat Vehicle) प्रोग्राम, जिसे अब घरेलू इंजन की ताकत मिल गई है। पहले MTU और Caterpillar जैसे विदेशी इंजनों पर निर्भरता थी, जो महंगे होने के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर में भी पाबंदियां रखते थे।

30–35 टन के वाहनों को देगी तूफानी रफ्तार

नए पॉवरपैक में 2000 rpm पर 600 HP की डिजाइन क्षमता है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक गवर्नर ओवरराइड के साथ यह 675 HP तक पहुंच जाता है। 1300–1700 rpm पर 2800 Nm से ज्यादा टॉर्क इसे 30–35 टन के ट्रैक्ड कॉम्बैट वाहनों के लिए आदर्श बनाता है। यानी भविष्य में भारतीय सेना के वाहनों को 26 HP/टन से अधिक स्पेसिफिक पावर मिलेगी, जो तेज गति, बेहतर क्लाइंबिंग और शानदार ऑफ-रोड परफॉर्मेंस सुनिश्चित करेगी।

लगभग 1650 किलो वजनी यह इंजन हाई-एफिशिएंसी लिक्विड कूलिंग, स्मार्ट थर्मल मैनेजमेंट, फुल-डिजिटल FADEC कंट्रोल और HUMS मॉनिटरिंग जैसे मॉडर्न फीचर्स के साथ आता है। यह किसी भी आधुनिक आर्मर्ड व्हीकल को आवश्यक स्मार्टनेस और मजबूती प्रदान करेगा।

सबसे बड़ी बात—यह इंजन विदेशी इंजनों के मुकाबले 40–45% सस्ता पड़ेगा, जिसका मतलब है कि भारत बड़े पैमाने पर इसे सीरीज-प्रोड्यूस करके भारी विदेशी खर्च से बच सकेगा।

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