इलेक्ट्रिक वाहनों की सबसे बड़ी चुनौती हमेशा से रेंज और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर रही है। लेकिन जर्मनी के स्टुटगार्ट की तकनीकी कंपनी MAHLE ने एक ऐसा सिस्टम पेश कर दिया है, जिसने EV दुनिया की दिशा ही बदल दी है। कंपनी ने एक प्रोडक्शन-रेडी तकनीक दिखाई है, जिसके जरिए एक सामान्य इलेक्ट्रिक कार 1,350 km तक चल सकती है वह भी बिना बैटरी को बहुत बड़ा किए। यह तकनीक IAA Mobility Munich में प्रदर्शित की गई, जहां MAHLE ने बताया कि कैसे एक स्मार्ट थर्मल मॉड्यूल और छोटा मल्टी-फ्यूल जनरेटर मिलकर EV रेंज को रिकॉर्ड स्तर तक ले जाते हैं।

MAHLE कोई कार निर्माता नहीं है, बल्कि ऐसी कंपनी है जो इंजन, थर्मल सिस्टम और हाई-वोल्टेज कंपोनेंट जैसी ऐसी तकनीकें बनाती है, जिन पर पूरी ऑटो इंडस्ट्री निर्भर रहती है। इस बार कंपनी ने ऐसा समाधान दिया है, जो बैटरी-साइज़ की दौड़ पर रोक लगा सकता है।
MAHLE की तकनीक आखिर काम कैसे करती है?
MAHLE ने जिस सिस्टम का खुलासा किया है, वह दो मुख्य तकनीकों पर आधारित है—एक कॉम्पैक्ट मल्टी-फ्यूल जनरेटर और एक हाई-इफिशिएंसी हीट-पंप थर्मल मॉड्यूल। पारंपरिक EVs में लंबी दूरी तय करने के लिए हीटिंग और बैटरी कंडीशनिंग में काफी ऊर्जा खर्च होती है। यही ऊर्जा की बर्बादी असली रेंज को 20–40% तक घटा देती है।
MAHLE का सिस्टम इस समस्या का बेहद रणनीतिक समाधान देता है। जनरेटर सिर्फ बिजली पैदा करता है, पहियों को कोई शक्ति नहीं देता। इसे इथेनॉल सहित कई फ्यूल पर चलाया जा सकता है, जो भविष्य के कार्बन-नियमों में ज्यादा लचीला विकल्प बन जाता है। दूसरी तरफ, थर्मल मॉड्यूल EV के तीन बड़े हिस्सों बैटरी, केबिन और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स का तापमान एक ही यूनिट से नियंत्रित करता है। इससे ऊर्जा की खपत कम होती है और कार ठंड में भी ज्यादा स्थिर रेंज देती है। यह संयोजन मिलकर एक मध्यम आकार की बैटरी को भी अत्यधिक कुशल बना देता है।
सर्दी में रेंज ड्रॉप खत्म—थर्मल मॉड्यूल की गेम-चेंजर भूमिका
EV रेंज सर्दियों में सबसे ज्यादा प्रभावित होती है, क्योंकि बैटरी तापमान गिरने पर अपनी क्षमता खो देती है और केबिन हीटिंग बैटरी खा जाती है। MAHLE का नया थर्मल मॉड्यूल इसी सबसे बड़ी कमजोरी को ठीक करता है। कंपनी का दावा है कि यह मॉड्यूल ठंड में 20% तक अतिरिक्त रेंज दिला सकता है। इसका कारण यह है कि यह हीट पंप के जरिए केबिन और बैटरी दोनों में गर्मी को पुनः उपयोग करता है, यानी गर्मी बाहर निकलने के बजाय सिस्टम के अंदर घूमती रहती है।
एक ही यूनिट सभी थर्मल जरूरतों को संभालती है, जिससे ऊर्जा बचती है, कार तेजी से चार्ज होती है और बैटरी की लाइफ भी बढ़ती है। यही वजह है कि MAHLE की तकनीक असल दुनिया की ड्राइविंग शर्तों में कहीं अधिक प्रभावी साबित हो सकती है, खासकर उन देशों में जहां सर्दी कड़ी होती है और चार्जिंग नेटवर्क कम विकसित है।
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