19 लाख किसानों को फायदा… फिर भी PM-KUSUM क्यों पिछड़ गया? सरकार की सबसे बड़ी सोलर योजना पर खतरा!

देश में कृषि को सोलर ऊर्जा से जोड़ने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) योजना आज एक अहम मोड़ पर खड़ी है। सरकार ने 34,800 मेगावाट का विशाल लक्ष्य रखा था, लेकिन ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक योजना अपनी पूरी अवधि के खत्म होने से सिर्फ चार महीने पहले सिर्फ 27.2% लक्ष्य ही पूरा कर पाई है। संसद में 31 अक्टूबर 2025 तक के आंकड़े बताते हैं कि कुल 9,466 मेगावाट क्षमता ही स्थापित हो सकी है। सवाल ये उठता है कि 19 लाख किसानों को फायदा होने के बावजूद यह योजना क्यों पिछड़ गई?

Pm kusum yojana update 2025

PM-KUSUM के तीन प्रमुख कंपोनेंट हैं—छोटे सोलर प्लांट (Component A), स्टैंडअलोन सोलर पंप (Component B) और ग्रिड-कनेक्टेड पंप की सोलराइजेशन (Component C)। लेकिन इन तीनों में प्रगति की रफ्तार समान नहीं रही। Component A के तहत केवल 653.49 मेगावाट ही इंस्टॉल हो सका, जो लक्ष्य की तुलना में बेहद कम है। जबकि Component B में 9.17 लाख सोलर पंप और Component C में 9.84 लाख पंप सोलराइज हुए हैं।

किस राज्य ने कितना काम किया और किसके कदम धीमे हैं?

राजस्थान Component A में सबसे आगे है, जहाँ 463.75 मेगावाट इंस्टॉल हुआ है, जबकि हिमाचल प्रदेश (100 MW) और मध्य प्रदेश (52.13 MW) काफी पीछे हैं। सोलर पंप इंस्टॉलेशन (Component B) में महाराष्ट्र ने बाज़ी मारी है, जहाँ 4.57 लाख पंप इंस्टॉल हुए। इसके बाद हरियाणा और राजस्थान का नंबर आता है। Component C में भी महाराष्ट्र टॉप पर है, जहाँ 5.68 लाख पंप सोलराइज किए गए हैं।

साफ दिख रहा है कि कुछ राज्य पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं, लेकिन कई राज्य पीछे रह गए हैं, जिसके कारण कुल राष्ट्रीय लक्ष्य अधूरा रह गया है। यही वजह है कि पूरे देश में सिर्फ 1.9 मिलियन किसानों को ही अब तक फायदा मिल पाया है, जिसमें से अकेले महाराष्ट्र में ही 10 लाख किसान शामिल हैं।

योजना की फंडिंग, चुनौतियाँ और आगे का रास्ता

सरकार ने PM-KUSUM के लिए ₹344.22 बिलियन की केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) तय की थी, जिसमें से ₹70.89 बिलियन अब तक जारी किए जा चुके हैं। फिर भी कई हिस्सों में परियोजनाएँ अटकी हैं—कहीं भूमि उपलब्ध नहीं हो रही, कहीं डिस्कॉम की मंजूरियाँ रूकी हुई हैं, तो कहीं किसानों को प्रक्रिया बेहद जटिल लग रही है। कई राज्यों में टेंडर तो जारी हुए हैं, पर प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हो पाए। उदाहरण के लिए, जून 2025 में मध्य प्रदेश ने 1.2 GW की बड़ी बोली निकाली और जयपुर विद्युत वितरण निगम ने भी अप्रैल 2025 में 1.2 GW की निविदा जारी की, लेकिन ज़मीन पर प्रोजेक्ट की रफ्तार अभी भी धीमी है।

सरकार किसानों को Component B और C में 30% तक CFA और राज्य सरकार की ओर से 30% तक सब्सिडी दे रही है, इसके बावजूद कई किसान upfront cost वहन नहीं कर पा रहे, जिससे योजना का विस्तार सीमित रह गया है।

मार्च 2026 तक PM-KUSUM योजना वैध है और अगर मौजूदा रफ्तार यही रही तो बड़ा लक्ष्य अधूरा रह जाने की आशंका गहराती जा रही है। इस बीच, विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर मंजूरी प्रक्रिया तेज़ हो, फंडिंग समय पर मिले और राज्यों के डिस्कॉम सक्रिय रूप से भाग लें तो आने वाले महीनों में प्रगति तेज़ हो सकती है।

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