अंतरिक्ष तकनीक की दुनिया में हर दिन कोई न कोई नई इन्नोवेशन सामने आती है, लेकिन इस बार जो खबर आई है उसने पूरी स्पेस इंडस्ट्री को हिला दिया है। 2027 तक धरती से भेजे जाने वाले सोलर पैनल नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में ही 3D प्रिंट होकर तैयार होने वाले सोलर एरे देखने को मिलेंगे। यह अद्भुत कारनामा जर्मनी की स्पेस टेक कंपनी Dcubed अपने नए ARQAYS सिस्टम के जरिए करने जा रही है।

अंतरिक्ष में क्यों बढ़ रही है सोलर एरे की जरूरत?
Commercial spaceflight पिछले कुछ वर्षों में इतनी तेज़ी से बढ़ा है कि आने वाले समय में ‘स्पेस इकॉनमी’ कई गुना बड़ी होने वाली है। सैकड़ों नए सैटेलाइट, स्पेस-टग, डेटा प्रोसेसिंग कंस्टीलेशन और पावर बीमिंग मिशन तैयार हो रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती ऊर्जा की बढ़ती मांग है। आज भी अधिकतर सैटेलाइट सिर्फ सोलर पैनल से ही चलते हैं, क्योंकि अंतरिक्ष में ना बादल हैं, ना रात का झंझट है। लेकिन मौजूदा सोलर पैनल भारी होते हैं, उन्हें फोल्ड करके भेजना पड़ता है और फिर स्पेस में खोलने के लिए अलग मैकेनिज्म चाहिए। यह सब लॉन्च के दौरान वजन बढ़ाता है, खर्च बढ़ाता है और पेलोड कम कर देता है।
Dcubed की नई तकनीक इन सभी समस्याओं का एक ही बार में समाधान करती है और वह है की पैनल ले जाओ मत, अंतरिक्ष में प्रिंट कर लो!
Dcubed का ARAQYS सिस्टम कैसे करेगा कमाल?
ARQAYS एक अल्ट्राथिन सॉफ्ट सोलर ब्लैंकेट पर आधारित सिस्टम है। जैसे ही सैटेलाइट ऑर्बिट में पहुंचता है, यह ब्लैंकेट खुद को धीरे-धीरे अनरोल करता है। इसी दौरान एक अत्याधुनिक 3D प्रिंटर वहीं पर उसका rigid बैक-सपोर्ट स्ट्रक्चर प्रिंट करता जाता है। अंतरिक्ष की कड़क UV रेडिएशन उस प्रिंटेड रेज़िन को तुरंत क्योर कर देती है, यानी कुछ ही मिनटों में पूरा स्ट्रक्चर सॉलिड बन जाता है। Dcubed का दावा है कि इस तकनीक से प्रति किलोवॉट लागत कई गुना कम हो जाएगी और भारी-भरकम डिप्लॉयमेंट मैकेनिज़्म की जरूरत खत्म हो जाएगी।
2027 में 2kW डेमो और फिर कमर्शियल लॉन्च
कंपनी इस साल 60 सेमी का पहला डेमो लॉन्च कर रही है, जिसके बाद 1 मीटर का बड़ा परीक्षण किया जाएगा। फिर 2027 में एक पूरा 2 kW का ऑपरेशनल डेमो सोलर एरे ऑर्बिट में बनाया जाएगा. और वही क्षण, जब स्पेस में 3D-प्रिंटेड सोलर पावर का नया युग शुरू हो जाएगा।Dcubed के CEO डॉ. थॉमस सिन के अनुसार, “यह सिर्फ शुरुआत है। आने वाले वर्षों में बड़े स्तर की इन-स्पेस एनर्जी जेनरेशन वास्तविकता बन जाएगी।” स्पष्ट है कि ARQAYS सिस्टम न सिर्फ सैटेलाइट डिजाइन को क्रांतिकारी तरीके से बदलने वाला है, बल्कि अंतरिक्ष में पावर जेनरेशन को उतना ही सामान्य बना देगा, जितना आज धरती पर सोलर पैनल हैं। आने वाले दशक में स्पेस स्टेशन, चंद्र मिशन और डीप-स्पेस प्रोजेक्ट भी इस तकनीक से चल सकेंगे।
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