Arkle Energy की यह Vanadium Redox Battery बनाती है नल के पानी से 7kW तक की पॉवर, लाइफ 25 साल!

सोचिए, अगर सिर्फ नल के पानी और एक खास मेटलिक सॉल्ट की मदद से आपके घर का बिजली बिल लगभग खत्म हो जाए तो? Arkle Energy ने इसी कल्पना को हकीकत में बदलते हुए ऐसी Vanadium Redox Flow Battery (VRFB) पेश की है, जो 7kW तक की पावर दे सकती है और जिसकी लाइफ 25 साल से भी ज्यादा बताई जा रही है। यह वही तकनीक है जिसे दुनिया के कई देशों में भरोसेमंद और लॉन्ग-लाइफ स्टोरेज के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। खास बात यह है कि कंपनी इसे पूरी तरह भारत में मैन्युफैक्चर कर रही है, जिससे कीमत आने वाले समय में और कम होने की उम्मीद है।

Vanadium Redox Battery details

कैसे बनती है पानी से बिजली?

इस बैटरी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है इसका “लिक्विड इलेक्ट्रोलाइट”, जिसे कंपनी नल के पानी में एक खास वेनेडियम बेस्ड नमक और थोड़ा एसिड मिलाकर बनाती है। यह लिक्विड बिजली को स्टोर भी करता है और जरूरत पड़ने पर वापस रिलीज भी करता है। पूरा सिस्टम दो बड़े टैंकों में स्टोर किए गए पॉजिटिव और नेगेटिव इलेक्ट्रोलाइट पर चलता है। जब सोलर पैनल या ग्रिड बिजली इसे चार्ज करते हैं, तो यह लिक्विड चार्ज हो जाता है। जैसे ही घर में बिजली जाती है, वही लिक्विड रिएक्टर (स्टैक) से गुजरता है और तुरंत बिजली पैदा कर देता है—बिल्कुल ऐसे जैसे पानी पंप से बहकर मोटर चलाता हो।

और सबसे खास बात इस बैटरी में कोई सेल्फ-डिस्चार्ज नहीं होता है। यानी अगर आपने इसे चार्ज कर दिया और 50 साल भी छोड़ दिया, तब भी यह चार्ज बिल्कुल वहीं का वहीं रहेगा। इसलिए VRFB टेक्नोलॉजी को दुनिया की सबसे विश्वसनीय एनर्जी स्टोरेज तकनीकों में गिना जाता है।

एक बार सेटअप, 25–75 साल तक आराम

कंपनी का दावा है कि यह 7kW का मॉडल एक साथ 3–4 दो-टन के AC आसानी से चला सकता है और 8 घंटे तक लगातार बैकअप दे सकता है। पारंपरिक लीड-एसिड बैटरी जहाँ 600–800 साइकिल चलती हैं और लिथियम बैटरी 3000–4000 साइकिल, वहीं Vanadium Redox Battery बिना किसी खास डिग्रेडेशन के 25 साल तक चल सकती है। जापान में 2002 में लगाया गया VRFB सिस्टम आज भी चल रहा है और सिर्फ 2–3% ही कमजोर हुआ है।

लिक्विड इलेक्ट्रोलाइट भी 25 साल तक बिना खराब हुए चलता है। उसके बाद सिर्फ हल्का-सा टॉप-अप करके सिस्टम फिर अगले 25 साल तक चलाया जा सकता है। यानी इस बैटरी की असली लाइफ 50–75 साल या उससे भी अधिक मानी जा रही है। इसके मुकाबले लिथियम बैटरी कई बार बदलनी पड़ती है, जिससे लॉन्ग-टर्म कॉस्ट काफी ज्यादा बढ़ जाती है।

भारत में बना समाधान, आने वाले समय में हो सकता है आम घरों में इस्तेमाल

अभी यह तकनीक इंडस्ट्री और बड़े सेटअप्स के लिए ज्यादा उपयोग की जा रही है, क्योंकि शुरुआती कीमत साधारण लोगों के बजट में फिट नहीं बैठती। लेकिन Arkle Energy का दावा है कि वह सभी कम्पोनेंट भारत में बनाकर लागत को तेजी से घटा रही है। जैसे-जैसे कीमत कम होगी, यह बैटरी एक आम भारतीय परिवार के लिए भी उतनी ही उपयोगी साबित होगी जितना आज सोलर पैनल है। आप इस बैटरी के बारे में www.ArkleEnergy.com वेबसाइट से जानकारी ले सकते है और कांटेक्ट करके खरीद भी सकते है.

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